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About the Book
Jayalalithaa was a superstar in every respect. Jayalalithaa—a journey is a book on her life and times. This book attempts to bring to the reader a whiff of the personality, an understanding of the person she was and the adulation that she garnered. Jayalalithaa was a convent educated polyglot, a beautiful young woman at the height of a successful career as an actor, capable of taking her own political decision. And that decision stood by her and her people through all the ups and downs that life threw at her.
A New York Times story called Jayalalithaa, ‘… a natural leader, glamorous and intelligent’. There was, undeniably, more to the woman than meets the eye. Her people were with her. She was their mother figure, not just an astute politician who won two elections in 2015 and 2016 with huge margins. And that is why this book.
What role did ministers like Shivraj Patil, P Chidambaram, AR Antulay, Digvijay Singh and officials like Chitkala Zutshi, Dharmendra Sharma, Hemant Karkare, RV Raju play in the Hindu Terror narrative? Here is a version of a man who almost was taken captive and was to be traded for release of Ajmal Kasab, but saved by sheer providence. In his insider account, author RVS Mani discloses how the country’s internal security establishment functioned in the period of 20042014 when India faced some of the bloodiest terrorist carnages. This former Home Ministry official posted in the Internal Security Division between 20062010 poses several questions which the nation should seek answers to.
इस कहानी की शुरुआत भारत के पहले 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से होती है जब गोरखपुर के अली नगर में बाबू बंधू सिंह को लटका दिया गया फांसी के फंदे पे. 1922 में चौरी -चौरा में निहत्थों को गोलियों से भून दिया गया , और वहीँ से आज़ादी की लड़ाई ने जोर पकड़ा. वास्तविकता में क्या हुआ था चौरी-चौरा में? क्यों गाँधी जी को दोष देना उचित है? एक सफर जो शुरू होता है गोरखपुर की गलियों से, और ले जाता है उस दुनिया में जहाँ 9/11 ने सब कुछ तहस नहस कर दिया था. क्यों गोरखपुर से लोगों का पलायन एक आम बात है? कैसा था दशकों पुराना गोरखपुर, और क्या होता है जब कोई वापस लौट के आता है? क्यों जाति पति और धर्म का बोल बाला है? हिंदुओं में और मुसलमानों में भी? क्यों सारी दुनिया की नज़र है भारत पर. इसका कारण चीन है या पाकिस्तान? मुसलमानों की क्या सत्ता में भागेदारी सम्भव है? ऐसे में बिछी है ऐसी बिसात जहाँ ‘बाहरी शक्तियां’ चल रही है नयी नयी चाल. और क्यों न हो सारी जंग सत्ता के लिए है? एक ऐसा चुनाव जो भारत ने कभी न देखा हो, चुनने को तैयार है उनको जो राज कर सकें. क्या वह शख्स आतंकवादी था या सिर्फ हालात का मारा. उसकी फांसी से चुनाव पे क्या असर पड़ने वाला है? शामिल हैं कश्मीर की वादियां, और उसमें रहने वाले लोग. एक ऐसी जंग जो दशकों पुरानी है. क्या होगा आगे? कैसे होगा और कब होगा? एक कहानी जिसे जानना ज़रूरी है. है न?
भारत का संविधान प्रत्येक भारतीय नागरिक के लिए संविधान का पालन करने और उसके आदर्शों, संस्थाओं और राष्ट्रीय ध्वज तथा राष्ट्रीय गान का सम्मान करने को प्रत्येक नागरिक का पहला और सर्वोच्च मौलिक कर्तव्य बनाता है। ऐसा करने के लिए सबसे पहले हमें अपने संविधान से यह जानना ज़रूरी है कि हम किस प्रकार शासित होते हैं, एक नागरिक के रूप में हमारे लोकतांत्रिक अधिकार व कर्तव्य क्या हैं, आदि। हमारे विद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों में शिक्षकों व विद्यार्थियों के बीच एक लक्ष्य होना चाहिए कि अंतर्गत वे अपने संविधान में रुचि लेते हुए उसके बारे में अधिक से अधिक जानें। यह पुस्तिका बहुत ही सरल और सहज भाषा में, विश्व के सबसे बड़े संविधान और उसकी कार्यप्रणाली को बहुत ही संक्षिप्त रूप में समझाने का प्रयास है। साथ ही, यह संविधान से जुड़ी बहुत सी प्रचलित भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास भी करती है। .
ये दास्तान आंखों में सुनहरे ख्वाब समेटे, आसमान फतह कर लेने का इरादे रखने वाले एक 24 बरस के युवा फाइटर पायलट की है। मिग-21 के इंजिन का शोर मानों उसकी नसों में बहता था। एमपी अनिल कुमार भारतीय वायुसेना के बेहतरीन फाइटर पायलटों में से थे, लेकिन एक हादसे ने जैसे सबकुछ बदल दिया। कभी हवा से बातें करने वाला एमपी अब गर्दन से नीचे पूरी तरह लकवाग्रस्त हो चुका था। एक लड़ाकू हवाबाज अब हमेशा के लिए व्हीलचेयर पर था। हादसे के बाद वो पायलट भले ही नही रहा हो लेकिन वो फाइटर हमेशा बना रहा, कभी न थकने वाला, कभी न हारने वाला, जीवन के प्रति उमंगों और उत्साह से लबरेज। हाथों ने साथ नहीं दिया तो उसने मुँह से लिखना सीख लिया। जीवन के अनुभवों से लेकर सामाजिक सरोकारों पर लिखे गए उसके लेख अखबारों के साथ-साथ लोगों के दिलों में भी जगह बनाते गए। इस हालत में भी वो दुनिया के लिए रोशनी की एक किरण था। तमाम उम्र वो लड़ते रहे – अपनी अपंगता से, अपनी लाचारी से, कैंसर से…लेकिन वो हारे नहीं… एक पायलट ने अब अपनी उड़ान के लिए नए फलक तलाश लिए थे, जहां वो ऊंचा और बहुत ऊंचा उड़ा। ये उनके ‘मन की उड़ान’ थी….