• YOGA-ANATOMY AND THE JOURNEY WITHIN

    YOGA-ANATOMY AND THE JOURNEY WITHIN

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    About The Book

    This book is about the forgotten art and science of healing: retrieved and reaped in easy steps. Equally, it is an attempt at interpreting the ancient Upanishadic wisdom through the author’s insight: showing the essential oneness of spirituality with the mind-body matrix. Layers of wisdom unravel as the author unfolds the science of Yoga: dispelling myths while reinforcing the Truth. Touching upon subjects of contemporary interest – Cosmic Energy, Reiki, Karma, Kundalini, Yoga, Health etc – the book has a universal appeal. Of particular interest to the scientifically-inclined is the author’s juxtaposing of scriptural wisdom of the East with the West’s path-breaking findings in Quantum Physics, Probabilistic nature of the Universe, Psychoneuroimmunology and Parapsychology. That the author throws light on these esoteric matters through the prism of his spiritual experiences, lends the whole narrative a kind of authenticity not common in books of this genre. The highlight of the book is its ability to touch the yoga-inclined masses in their daily life and facilitate their ‘three-dimensional’ healing through easy-to-make forays in diet control, asana-pranayama, alternative therapy, meditation and karmic remedies.

    425.00
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  • YOUR POCKET PLANNER FOR PREGNANCY

    YOUR POCKET PLANNER FOR PREGNANCY

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    About the Book

    Information about a pregnancy is most crucial in the first three months after conception. As a couple planning a baby it is in your interest to consult an obstetrician even before conception. Planning ahead is the key to managing a pregnancy so that it is a healthy and happy experience for both of you. Your Pocket Planner for Pregnancy is designed to give you the confidence that comes from knowing what to do without burdening you with too many details best left to the doctors. With glossaries at the end of each chapter and useful images, this clear, concise pocket planner provides step-by-step advice based on up-to-date medical practices. In addition, a special section is included to answer questions that typically arise in the context of pregnancy. Homemakers, careerwomen and their partners will all benefit from reading this book.

    399.00
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  • YOUR PRIME MINISTER IS DEAD

    YOUR PRIME MINISTER IS DEAD

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    About The Book

    When Lalita Shastri saw her husband’s body, it did not appear he had been dead only a few hours. His face was dark bluish and swollen. The body was bloated and it bore strange cut marks. The sheets, pillows and the clothes were all soaked in blood. As the family members raised doubts, suddenly sandal paste was smeared on Lal Bahadur Shastri’s face. And yet, the controversy whether or not India’s second prime minister’s death was really due to a heart attack, couldn’t be contained. Allegations of the KGB’s, the CIA’s or an insider’s hand in the death of Lal Bahadur Shastri emerged in time.

    350.00
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  • YOUTH & INDIA’S SUSTAINABLE DEVELOPMENT GOALS

    YOUTH & INDIA’S SUSTAINABLE DEVELOPMENT GOALS

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    About the Book

    Youth & India’s Sustainable Development Goals gives an overview of the state of India’s youth and the lacuna in their development. It is a book that provides perspectives on the role and contribution of 300 million youth in achieving the UN-set sustainable development goals. Despite umpteen policies for children and youth for more than 70 years, welfare measures do not percolate down to those who need them the most. The chain of weak mothers giving birth to malnourished children continues to make generations of Indian youth weak, incapable, uneducated, unskilled and poor. But surprisingly, no attempts have been made by researchers to study and provide ways to remedy the looming skill-level disaster that the country faces in the coming decade.

    750.00
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  • नरेंद्र मोदी: विचार यात्रा (2014-2024)/ NARENDRA MODI: VICHAR YATRA (2014-2024)

    नरेंद्र मोदी: विचार यात्रा (2014-2024)/ NARENDRA MODI: VICHAR YATRA (2014-2024)

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    About the Book

    भारत की स्वतंत्रता के बाद बिखर रहे समाज के एकीकरण के लिए सनातन चेतना का जागरण एक चुनौती थी। इस चेतना के सांस्कृतिक आयाम को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने और राजनीतिक आयाम को जनसंघ से होते हुए भारतीय जनता पार्टी ने समाज में स्थायी आधार दिया। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के पश्चात नरेन्द्र मोदी इन दोनों पहियों में संतुलन बनाने में सफल रहे हैं। यह पुस्तक वस्तुतः 2014 से 2024 के मध्य नरेन्द्र मोदी की वैचारिक नैष्ठिकता के अनुष्ठान का आधार दस्तावेज़ है जिसमें पाठक को दिखेगा कि कैसे उन्होंने इस बीच विधायिका और कार्यपालिका को जन-सामर्थ्य बढ़ाने वाले टूल में और विकसित भारत के सपने को एक आन्दोलन में बदल दिया।

    995.00
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  • बड़े सपनों की ओर नन्हें कदम /BADE SAPNO KI AUR NANHE KADAM

    बड़े सपनों की ओर नन्हें कदम /BADE SAPNO KI AUR NANHE KADAM

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    About the Book

    बदलते समय में, बच्चों की परवरिश की कला भी कई नई चुनौतियों और बदलावों के दौर से गुजर रही है। तकनीकी युग में बच्चों के पास अच्छे-बुरे अनुभवों और विकर्षणों की भरमार है, जिससे उनका मानसिक और भावनात्मक संतुलन बनाए रखना माता-पिता के लिए अधिक कठिन हो गया है। अब बच्चों से जुड़ने और उन्हें समझने के तरीकों में बदलाव जरूरी हो गया है। यह पुस्तक माता-पिता और शिक्षक समूह के लिए एक मार्गदर्शक उपकरण है, जो उन्हें बच्चों के जन्म से लेकर किशोरावस्था तक के महत्वपूर्ण वर्षों में उनके विकास को गहराई से समझने और बेहतर तरीके से परवरिश करने में मदद करती है। सकारात्मक और सार्थक संवाद के माध्यम से, माता-पिता व शिक्षक बच्चों के लिए ऐसा स्वस्थ वातावरण बना सकते हैं जो उनकी सीखने की अभिलाषा, भावनात्मक स्थिरता और आत्मविश्वास को पोषित करे। यह पुस्तक उन प्रक्रियाओं और विधियों का संग्रह है जो आपको परवरिश की नई चुनौतियों के बीच सही मार्गदर्शन प्रदान करती हैं, ताकि आप अपने बच्चों को आत्म-सम्मान और आत्मविश्वास से भरपूर स्वस्थ युवा बनाने में सहायता कर सकें।

    350.00
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  • भारत की शैक्षिक धरोहर

    भारत की शैक्षिक धरोहर

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    About the Book

    यूरोपीय विश्वविद्यालयों की स्थापना से बहुत पहले भारत में ज्ञानार्जन के बहु-विषयक केंद्र थे जिन्होंने विश्व भर में ज्ञान क्रांति को बढ़ावा दिया। यह पुस्तक भारत की महान शैक्षिक विरासत को कालक्रमानुसार दर्शाने की आवश्यकता को पूरा करती है। यह पुस्तक उस अद्वितीय पारिस्थितिकी तंत्र का वर्णन करती है, जिसने यह सुनिश्चित किया कि गुरुओं और आचार्यों द्वारा पीढ़ियों तक छात्रों को ज्ञानार्जन का सौभाग्य मिलता रहे। जैसा लेखिका कहती हैं, “जब तलवारों ने रक्त से अपनी प्यास बुझाई और अकाल ने भूमि को तबाह कर दिया, तब भी भारतीय अपनी प्रज्ञा पर टिके रहे कि ज्ञान से अधिक पवित्र कुछ भी नहीं है।” लेखिका ने वाचिक इतिहास, स्थानीय विद्या, यात्रा वृतांत, उत्तरजीवी साहित्य, शिलालेख, संरक्षित पांडुलिपियों और विद्वानों व जनसाधारण के जीवन वृत्तान्त से जानकारी एकत्र की है। ऐतिहासिक रूप से, यह पुस्तक प्राचीन भारत की परंपराओं से लेकर इसकी विरासत के जानबूझकर विनाश करने तक के एक वृहत् काल को अंकित करती है। यह विद्यालय और विश्वविद्यालय शिक्षा की वर्तमान संरचना में प्राचीन शिक्षण प्रणालियों के सबसे प्रासंगिक पहलुओं को सम्मिलित करने के लिए आज उठाए जा सकने वाले कदमों की रूपरेखा से भी अवगत कराती है।

    495.00
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  • भारतीय राज्य व्यवस्था / BHARATIYA RAJVYAVASTHA

    भारतीय राज्य व्यवस्था / BHARATIYA RAJVYAVASTHA

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    About the Book

    यह पुस्तक लेखक-द्वय के लगभग अठारह वर्षों के अध्ययन अनुभवों के साथ-साथ उनकी प्रशासनिक सक्रियता से प्राप्त अकादमिक व व्यवहारिक ज्ञान से उपजी है, जिसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें छात्रों की न केवल शिक्षण संबंधी कठिनाइयों को भली-भाँति समझा गया है, बल्कि उन्हें विषय संबंधी व्यवहारगत उचित मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया है। यही कारण है कि विशेष रूप से सिविल सेवा और प्रांतीय लोक सेवा की तैयारी कर रहे अभ्यार्थियों के लिए लिखी गई यह पुस्तक अन्य स्नातक विद्यार्थियों के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। समसामयिक घटनाओं, जैसे कि-जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में धारा 370 के उपखंड-1 को छोड़कर अन्य उपखंडों का निरसन, विशेष राज्य के दर्जे को वित्त आयोग की अनुशंसा के द्वारा समाप्त किया जाना, नदी जल विवाद (कावेरी के विशेष संदर्भ में), उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए पुनः पुरानी कॉलेजियम पद्यति की पुनर्बहाली, लोकपाल एवं लोकायुक्त जैसे पदों का सृजन इत्यादि विषयों को समाविष्ट करना इस पुस्तक की उपयोगिता को कई गुना बढ़ा देते हैं।

    350.00
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  • लाचार नहीं हम/LACHAAR NAHIN HUM

    लाचार नहीं हम/LACHAAR NAHIN HUM

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    दिव्यांगता क्या है, इसकी परिभाषा क्या है, यह कितना गंभीर विषय है, दिव्यांग जनों की जनसंख्या कितनी है, इनके लिए देश और दुनिया में कानून क्या हैं, उनके अधिकार क्या हैं, यह पुस्तक दिव्यांगता से संबंधित इन सभी प्रश्नों के उत्तर और अन्य पहलुओं पर गहन चर्चा करती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में विकलांगों की जनसंख्या करीब 103 करोड़ है या विश्व की कुल आबादी का 15 प्रतिशत है। इतनी विशाल जनसंख्या होने के बावजूद हमारा ध्यान उनकी तरफ नहीं जाता है जबकि बहुत से दिव्यांग लोग शारीरिक कमजोरियों के बावजूद अनेक क्षेत्रों में सफलता के शिखर पर पहुंच रहे हैं जो यह साबित करता है कि वे मानसिक रूप से खुद को लाचार नहीं मानते हैं और कुछ भी करने में सक्षम हैं। कई संगठन भी उनके लिए सराहनीय प्रयास कर रहे हैं और उनके दबाव की वजह से सरकारें भी दिव्यांग जनों के लिए कानून बना रही हैं। फिर भी वे हमारे समाज की मुख्यधारा का हिस्सा नहीं बन पाए हैं। हमें एक समावेशी समाज बनाने की जरूरत है। यह पुस्तक समावेशी समाज बनाने की दिशा में काम कर रहे अनेक संगठनों और निजी प्रयासों के बारे में जानकारी देती है। कुल मिलाकर दिव्यांगता के विषय पर यह एक व्यापक तस्वीर पेश करने वाली प्रामाणिक पुस्तक है।

    495.00
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  • सफल सार्थक और सुखी जीवन का मार्ग : श्रीमद्भगवद्गीता

    सफल सार्थक और सुखी जीवन का मार्ग : श्रीमद्भगवद्गीता

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    भगवद् गीता एक ऐसा ग्रंथ है जो सदियों से अपने आध्यात्मिक ज्ञान से अज्ञान के अंधकार को दूर करके हमारे जीवन को प्रकाशित करता रहा है और हमारा मार्गदर्शन करता रहा है। यह हमें फल की कामना के बिना सदा कर्म करने के लिए प्रेरित करता है। वास्तव में गीता जीवन का एक संपूर्णदर्शन है जो हमारे जीवन को सार्थक और आध्यात्मिक रूप से सुखी बनाने का मार्ग दिखाता है। गीता पर समय-समय पर ढेरों टीकाएं लिखी जा चुकी हैं और उनमें गहन व्याख्याएं की गई हैं लेकिन अधिकतर टीकाएं इतनी गूढ़ हैं कि साधारण पाठकों के लिए अत्यंत दुरूह हो जाती हैं। शायद इसी बात को ध्यान में रखकर डॉ. सुभाष काश्यप जी ने गीता को यथावत् रूप में साधारण पाठकों के सामने प्रस्तुत करने का सराहनीय प्रयास किया है। वयोवृद्ध विद्वान डॉ. काश्यप करीब 80 वर्ष पहले अपने विद्यार्थी जीवन से ही गीता के उपदेशों के प्रति आकर्षित हो गए थे। उन्होंने तभी से गीता पर एक सरल टिप्पणी लिखने का संकल्प कर लिया था। वैसे तो वे दर्शन एवं राजनीति शास्त्र के अध्येता और विद्वान हैं और इन विषयों पर उनकी सौ से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं लेकिन गीता पर सरल टिप्पणी लिखने का उनका संकल्प अब पूरा हुआ है। इस पुस्तक की विशेषता यह है कि गीता के श्लोकों का अर्थ सरल भाषा में यथावत् रूप में प्रस्तुत किया गया है। गीता को समझने की इच्छा रखने वाले साधारण पाठकों को निश्चित रूप से यह पुस्तक बहुत पसंदआएगी।

    425.00
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